मैं जिसकी मुस्कुराहटो पे जीता मरता था,
आज खुद के लिए भी वक़्त निकालना मुश्किल है।
लोगो को सीखा देंगे मोहब्बत ऐसे होती है…!
जज़्बात जब काग़ज़ पर उतारे तो पता चला—
इस शहर में जीने के अंदाज़ भी क्या निराले हैं,
जिन्हें मिलती मंज़िल उंगलियों पे वो खुश है।
मोहल्ले की मोहब्बत का भी अजीब फसाना है,
जो मिल नही सकता उससे मोहब्बत क्यों है…!
मोहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो…!
क्योंकि वो बड़े लोग हैं अपनी मर्जी से बात करेंगे…!
वरना वक्त की धूल में बिखरकर खो जाते हैं।
हम भी अब खुद को छोड़कर किसी को पसंद नहीं करते।
इस ज़िंदगी में रेहान… बस बड़े तमाशे Sad Shayari in Hindi मिलते हैं।
मुझे वहाँ से समझो… जहाँ मैं ख़ामोश हो जाता हूँ,